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एक अनूठी पहल : उ. प्र. उच्च शिक्षा डिजिटल लाइब्रेरी

Principal’s message

There has been a massive transformation in higher education for the past few years. It is the need of time to go ahead with the emerging trends and pursue the goals set for us. We are supposed to undergo an academic audit of self assessment for a concrete change.

Principal

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छात्र का सर्वांगीण विकास ही शिक्षक का मुख्य दायित्व- डॉ. मीनाक्षी वाजपेयी।

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय खैर,अलीगढ़ द्वारा शिक्षक दिवस (5 सितंबर) के अवसर पर दिनांक 4 सितंबर 2021 को अपराह्न 1 बजे से एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. मीनाक्षी वाजपेयी जी ने किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति को नमन करते हुए शिक्षक दिवस की महत्ता बताई और कहा कि जिस भी संस्थान के शिक्षक उत्साही होंगे वह संस्थान और वहां के बच्चे ऊंचाई पर पहुंचेंगे।

शिक्षा हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। जिस परिवार में एक भी बेटी या बेटा पढ़ लिखकर योग्य बन जाता है वह परिवार बेहतर जीवन स्थिति को प्राप्त हो जाता है। हमारा कर्तव्य है कि हम हर परिवार के हर बेटी-बेटा को शिक्षित और संस्कारित करें जिससे हमारा समाज और हमारा देश आगे बढ़े।

भारत की प्राचीन शिक्षा पद्यति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय शिष्य गुरु के समीप रहकर शिक्षा प्राप्त करता था जिससे वह ज्ञान और संस्कार दोनों सीख सकने में सक्षम होता था। हमारा दायित्व है कि हम छात्र के बहुमुखी विकास पर ध्यान दें।

उन्होंने यह भी कहा कि हर छात्र में कुछ खास तरह की स्किल होती है जिसे पहचानकर आगे बढ़ाने का काम शिक्षक का होता है। छात्रों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हमें प्रतिदिन आत्म-मूल्यांकन करना चाहिए। हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पीछे न राह जाएं इसलिए यह कार्य अनवरत चलते रहना चाहिए।

यह सिर्फ छात्र को ही नहीं अपितु शिक्षक को भी करते रहना चाहिए। अंत में उन्होंने कहा कि भारत सरकार में नई शिक्षा नीति 2020 में कई ऐसा प्रावधान किया है जिसके आधार पर छात्र का सर्वांगीण विकास संभव है। छात्र का सर्वांगीण विकास ही हमारा अंतिम उद्देश्य होना चाहिए।

अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आरके गोस्वामी ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन संघर्ष को याद करते हुए शिक्षक को एक कुम्हार की तरह बताया। कबीर की साखी ‘गुरु कुम्हार शिष्य कुम्भ है,गहि गहि काढ़े खोट। भीतर हाथ सहाय दे बाहर मारे चोट’ के माध्यम से उन्होंने अपनी बात रखी और छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

रसायनशास्त्र विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एमपी सिंह ने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से शिक्षक की वस्तुस्थिति का बयान किया। उन्होंने कहा कि हमें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और कर्म से सीख लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

इस क्रम में महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. रूमान सिंह, डॉ. रेणु जैन, डॉ. देवेंद्र पाल, डॉ. अजय प्रताप सिंह,श्री धर्मेंद्र सिंह चाहर, श्री प्रदीप कुमार, श्रीमती ललिता देवी, डॉ. वर्तिका अग्रवाल, डॉ. कुमकुम पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

छात्रों की तरफ से विवेक कुमार और शिवानी ने अपने विचार व्यक्त किये।

कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर जगन्नाथ दुबे ने किया व धन्यवाद ज्ञापन कॉमर्स फैकल्टी के डॉ.गौरव गोयल ने दिया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक गण और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।


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